देश की समस्याएं और उनके समाधान से संबंधित सुझाव

देश की समस्याएं और उनके समाधान हेतु सुझाव : –

  • बेरोजगारी : हर साल नौकरी निकाली जाएं
  • गरीब के लिए भी अच्छी शिक्षा का प्रबंध हो
  • सभी को समान स्वास्थ्य सुविधा महैया कराई जाएं
  • किसान को फसल की MSP की गारंटी दी जाए
  • पुलिस, प्रशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किये जाएं
  • महिला सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं
  • व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा
  • सड़कों की हालत में सुधार किया जाए
  • महंगाई को कंट्रोल किया जाए
  • कमर तोड़ने वाले टैक्स में राहत दी जाए
  • गैस सिलिंडर, पेट्रोल, डीजल इत्यादि के नाम पे लूट बंद हो
  • उत्पादक (किसान) और उपभोक्ता के बीच बिचौलियों को हटाना
  • नेताओं की रैलियों पर प्रतिबंध लगाना।
  • अभिव्यक्ति की आजादी
  • आवारा पशुओं का प्रबंध
  • गाली गलौज करने वालो को सजा
  • मोबाइल कंपनियों द्वारा रिचार्ज के नाम पे लूट
  • किन्नरों की समस्या
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस में समानता
  • अतिक्रमण की समस्या
  • चुनावी खर्चे से आजादी
  • धर्म को धंधा बनाने पर प्रतिबंध
  • झूठे वादों वाले नेताओं की अर्हता रद्द हो
  • पानी की बर्बादी बचाना

हर साल नौकरी निकाली जाएं –

देश-प्रदेश के विश्वविद्यालयों से हर साल लाखो युवा डिग्री लेकर निलते हैं। उसके बाद से ही वे नौकरी की तलाश में निकल पड़ते हैं। लेकिन वर्तमान सरकारों के रवैये के चलते आज युवा नौकरी के लिए तरस रहे हैं। अधिकांश सरकारें तो सालों तक नौकरी ही नहीं निकालती हैं। कुछ सरकारें नौकरी निकालती हैं तो उसमें भ्रष्टाचार व धाधंली के चलते योग्य उम्मीदवार चयन से कोसो दूर रह जाता है। सरकारों को चाहिए कि हर साल जितने युवा डिग्री लेकर विश्वविद्यालों से निकल रहे हैं, उसी अनुपात में नौकरी निकाले और समय पर भर्ती प्रक्रिया को पूरा करे (ठीक जैसे चुनाव की पूरी प्रक्रिया जरा से समय में पूरी कर ली जाती है)। आज देश में सबसे बुरी हालत में यदि कोई वर्ग है तो वो है शिक्षित युवा। क्योंकि गरीब माँ-बाप पाई-पाई बचाकर उसकी शिक्षा पर खर्च करते हैं और आगे चलकर वही दर-दर भटकने के मजबूर है। ऐसे में उसकी सामाजिक व मानसिक स्थिति कैसी होती है ये एक युवा ही बता सकता है।

गरीब के लिए भी अच्छी शिक्षा –

‘शिक्षा’ ही है जो होमो सैपियंस को बाकी के जानवरों से अगल बतानी है। शिक्षा के बिना मानव पशु के समान है। वर्तमान में सरकारों द्वारा गरीबों के लिए भी स्कूलों का निर्माण तो किया है। परंतु उनकी शिक्षा का स्तर क्या है ये सभी के सामने है। हालांकि कुछ-एक राज्यों ने सरकारी स्कूलों में भी उच्च गुणवत्ता के प्रबंध पर ध्यान दिया है। परंतु वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उसे अपवाद की कहेंगे। क्योंकि देश के अन्य सभी राज्यों में गरीबों के लिए शिक्षा का वो स्तर पाना अभी सपना ही है। इसके पीछे सरकारों की गतल मंशा ही दृष्टिगत होती है। क्योंकि शिक्षित युवा सरकार के लिए सदैव चुनौती ही सिद्ध होते हैं। इसके विपरीत अशिक्षित व मूर्ख जनता राजनीतिक लुटेरों के लिए सर्वोत्तम उपयोगी सिद्ध हुई है।

सभी को स्वास्थ्य सुविधा –

‘स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मस्तिष्क का वास होता है’। लेकिन आज के प्रदूषण भरे वातावरण और सिंथेटिक खान-पान के कारण अक्सर लोगों स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहते हैं। सभी को समान स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा पाना तो इतना आसान नहीं है। परंतु हर किसी को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जाए इस बात का भी ध्यान रहे।

किसान को फसल की MSP की गारंटी

यह आज के देश के सबसे बड़े उत्पादक (किसान) की एक बेहद गंभीर समस्या है। किसान साल भर मौसमी आपदाओं से जूझकर फसल उगाता है। कई बार तो बारिश, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान इत्यादि से किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। जैसे तैसे जब फसल तैयार हो जाती है। तो उसके बाद भी इन्हें नौने-पौने दाम पर बेचने पर मजबूर हो जाता है। बाबजूद इसके कि आज खाद, बीज, डीजल इत्यादि के दाम दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रहे हैं। ऐसे में आधुनिक कृषि उपकरणों का प्रयोग करने के बाद भी किसान की आय में उस तेजी से वृद्धि नहीं हो रही।

पुलिस, प्रशासन एवं सुरक्षा व्यवस्था में सुधार

यह किसी भी राज्य व देश में आंतरिक शांति एव व्यवस्था बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। आम आदमी का सर्वाधिक वास्ता पुलिस एवं प्रशानिक से ही पड़ता है। इसलिए पुलिस एवं प्रशासन का ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ एवं भ्रष्टाचार से मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है। भयमुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त व अपराधमुक्त समाज बनाने की केवल शपथ लेना ही महत्वपूर्ण नहीं है। इसे असल जिंदगी में लागू करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। पुलिस के रवैये से देश का हर नागरिक भली भांति परिचित है अतः इस संबंध में किसी टीका टिप्पणी की आवश्यकता नहीं। कई राज्यों में तो एफआईआर कराने तक में लोगों के पसीने छूट जाते हैं। अक्सर हमें अखबार या सोशल मीडिया से देखने को मिलता रहता है कि ‘थाने गई बलात्कार पीड़िता को पुलिस ने गाली-गलौज कर भगा दिया’। यहाँ पर हमें अदम गोंडवी की एक कविता ‘चमारों की गली’ याद आती है।

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महिला सुरक्षा के लिए उचित कदम

जहाँ एक ओर देश में Gender Equality की बात हो रही है। महिलाओं को आगे लाने के लिए राज्य व केंद्र स्तर पर तमाम तरह के कार्यक्रम व पहल की जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर आज भी महिला को अंधेरा होने पर घर से बाहर जाना हो तो किसी को साथ ले जाना पड़ता है। हालांकि कुछ Working Women इसका अपवाद हैं।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा –

हालांकि हमारा संविधान हमें वयस्क होने पर तमाम तरह की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रदान करता है। साथ ही भारतीय कानून व्यवस्था में भी हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खास ध्यान रखा गया है। यहाँ हर व्यक्ति को खुद के अनुसार जीवन यापन करने की स्वतंत्रता है। लेकिन हमारा यह नागरिक अधिकार हमसे कितना दूर है ये जगजाहिर है। यहाँ एक व्यक्ति को अपने जीवन का सबसे बड़ा फैसला (विवाह) लेने तक का वास्तविक अधिकार नहीं है। देश व समाज को न जाने कितने धर्म, जाति, ऊँच-नीच जैसे आधारों पर बाँट रखा है।

सड़कों की हालत में सुधार हो

घोड़ा-गाड़ी, बैलगाड़ी, डीजल, पेट्रोल गाड़ी के बाद आधुनिक मानव ने इलेक्ट्रिक वाहनों की दुनिया में कदम रख लिया है। लेकिन सड़कों हालत बनने के 2 साल बाद ही ऐसी हो जाती है कि बस गड्ढे ही नजर आते हैं। देश में हर साल लाखों लोग इन गड्ढों के कारण अपनी जान गवा देते हैं। ट्रैफिक पुलिस सिर्फ जनता ते चालान काटने में लगी रहती है। कभी हेलमेट के नाम पर, कभी डीएल, प्रदूषण सर्टिफिकेट, सीट बेल्ट इत्यादि। इस समस्या का दूसरा पहलू देखिए। क्या कभी दिमाग मे आया कि किसी सड़क के गड्ढे क्यों नहीं भरवाती सरकार ? रोड टैक्स, टोल टैक्स, डीएल बनवाने की फीस, पेट्रोल, डीजल पर टैक्स, रिपेयर पार्ट्स पर टैक्स फिर भी सड़कों की ऐसी हालत क्यों ? किसी भी हाईवे का बजट हजारो करोड़ में होता है 4 साल बाद अगल उसके गड्ढे भरवाये जायें तो बजट का 1% रुपया भी बहुत होगा। यदि किसी साधारण सड़क की बात करें तो 2 दिन में चालान के नाम पे की गई बसूली भर के पैसों से ही सारे गड्ढे भर जायेंगे। फिर भी सालो साल जनता की जान जोखिम में डालकर सरकार सड़कों पर ध्यान नहीं देती। आखिर क्यों ? क्या कभी आपके दिमाग में ये खयाल नहीं आया कि इन चंद रुपयों के लिए क्यों जनता की जान जोखिम में डाली जाती है ? इसके पीछे है वाहन निर्माता और टायर निर्माता कंपनी से मिलने वाली मोटी रकम। कैसे ? अगर चमचमाती सड़कें बना दी गईं तो 10 साल चलने वाला वाहन 20 साल चलेगा और 4 साल चलने वाला टायर 8 साल। मतलब वाहन निर्माता कंपनी जितने समय में 1 हजार करोड़ का फायदा कमाती है उतने समय में अब उसे मात्र 500 करोड़ का फायदा होगा। तो ये कंपनिया सड़क बनाने वालों, नेताओं और संबंधित सभी बेईमानों को मोटी रकम देकर सड़कों को इस तरह से बनवाती हैं कि वो ज्यादा न टिकें। ठीक उसी तरह जिस तरह दीवाली पर 30 रुपये वाली झालर। उस झालर को चाहे आप हाईटेक तिजोरी में ही क्यों न रख दें, वो अगले साल तक खराब हो जाएगी। क्योंकि उसे बनाया ही गया है कि अगले साल तक खराब हो जाए और लोग फिर से पैसा देकर नई खरीदें। हालांकि सड़क के नाम पर बजट इनता होता है कि सारा लगा दिया जाए तो सड़क 4 नहीं 400 साल में भी न टूटे।

महंगाई को कंट्रोल करना

यह वर्तमान की सबसे गंभीर (परंतु बनाई गई) समस्या है। यह ऐसी समस्या है जिसे सरकार बड़ी ही आसानी से समाप्त कर सकती है। जब चाहे इस समस्या को समाप्त किया जा सकता है। लेकिन फिर भी भ्रष्टाचार के चलते पूरा देश इस समस्या से जूझ रहा है। आज नमक, दाल, चीनी, सब्जी, कपड़े, मोबाईल, रिचार्ज, किराया, फीस, वाहन इत्यादि सभी के नाम पर आम जनता की लूट हो रही है। जब्कि इस समस्या को बड़ी आसानी से सुलझाया जा सकता है। समाधान से पहले समझिये कि ये समस्या है क्यों ? क्यों हर चीज के दाम इतनी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी वजह बढ़ती आबादी को माना जाता है। लेकिन आबादी दो हर साल मात्र 2% ही बढ़ती है। फिर एक ही साल में कीमतें इसका 10 गुना कैसे बढ़ जाती हैं ? जो चीज आप आज 100 रुपये की लाये हैं वो एक ही साल में 110, 120 फिर 130 की कैसे हो गई ? जितनी महंगाई 10 साल में बढ़नी चाहिए उतनी साल भर में कैसे बढ़ जाती है ? निजी विक्रेता से लेकर सरकार तक पेट्रोल, डीजल, बिजली के दाम साल में अनगिनत बार क्यों बढ़ाती है ? गेहूँ की MSP 19 रुपये किलो होने पर किसान 16 रुपये के दाम में गेहूँ बेचता है और फिर आटा 16 से 28 तक कैसै पहुँच जाता है ?

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महंगाई की समस्या का समाधान –

  • सरकार बस ये घोषणा कर दे कि किसी भी उत्पाद पर 1 साल में सिर्फ एक बार ही कीमत बढ़ाई जाएगी। जो चीज 1 जनवरी 2011 को 100 रुपये की मिल रही है वो 31 दिसंबर 2022 को भी 100 की ही बिकेगी।

कमर तोड़ने वाले टैक्स में राहत

जब भारत आजाद हुआ तब नाममात्र लोग ही सरकार को टैक्स देते थे। लेकिन वर्तमान में देश का हर नागरिक 1 रुपये की माचिस से लेकर करोड़ों का सामान खरीदते वक्त टैक्स देता है। रोड टैक्स, टोल टैक्स, डीजल, पेट्रोल पर टैक्स, घरेलू गैस पर टैक्स, स्कूल फीस पर टैक्स, कपड़े, चप्पल, चश्मा, जूता, पेन, कॉपी, मोबाइल, कपड़े, टीवी, फ्रिज, पंखा, बिजली, टॉफी, बिस्कुट इत्यादि। हर जगह एक आम आदमी टैक्स देता है। आम जनता पर टैक्स इतना होना चाहिए कि वो बोझ न लगे। लेकिन आज टैक्स के बोझ के तले आम आदमी को घर चलाना मुश्किल पड़ रहा है।

गैस सिलिंडर, पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम –

आज के समय में घरेलू गैस, डीजल व पेट्रोल हर आम आदमी की आम जरूरत हो गया है। इनकी कीमतों में वृद्धि होना आम बात है। लेकिन जब एक ही साल में या कई बार तो एक ही माह में इनकी कीमतों में वृद्धि करना देश की आम जनता पर भयंकर बोझ डाल रहा है।

उत्पादक (किसान) और उपभोक्ता के बीच बिचौलियों को हटाना

देश का किसान दिन रात मेहनत करके अपने खून पसीने से सींचकर फसल को उगाता है। वह साल भर खेती करके जितना मुनाफा नहीं कमा पाता उतना ये मोटे बिचौलिये एक दिन बिचौलिया बनकर उससे पैसा कमा लेते है। पहले परिवहन के साधन न होने के कारण किसान अपना माल सीधा उपभोक्ता तक नहीं पहुँचा सकता था। लेकिन आजकल हर किसी के पास अपनी गाड़ी और किसान तक पहुँच है। किसान अपना माल मंडी में लेजाकर सीधा उपभोक्तो को क्यों नहीं बेच सकता ? वहाँ खड़े बिचौलियों की क्या आवश्यकता ? यहाँ पर मैं उदाहरण दूंगा आलू का मैं एक खेत में गया जहाँ किसान अपना आलू 7 रुपये किलो के भाव में बेच रहा था। बिचौलिया उस आलू को चिप्स निर्माता कंपनी को बेचता है। फिर गरीब किसान से 7 रुपये में लिया गया वही आलू चिप्स के रूप में 250-300 रुपये किलो में बिकता है।

अभिव्यक्ति की आजादी –

वैसे तो भारतीय संविधान ने अभिव्यक्ति की आजादी दे रखी है। लेकिन क्या वास्तव में आपको अपनी बात रखने का अधिकार है ? क्या आप किसी ऐसे पाखंड के विरुद्ध अपनी बात रख सकते हैं जिस पाखंड का किसी भी प्रकार का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य न हो, और उनके नाम पर देश भर में ढोंक का माहौल बनाया जा रहा हो। क्या आप किसी के काल्पनिक अस्तित्व पर सवाल उठा सकते हैं ?

आवारा पशुओं का प्रबंध –

 

गाली गलौज करने वालो को सजा –

ये आजकल देश में आम बात जैसे हो गई है। आप रोड पर हों, बाजार में, गली में, नुक्कड़ पर, स्कूल में या मोहल्ले मे कहीं भी लोगों ने माहौल को गंदा कर रखा है। पास से किसी की माँ, बहन, बेटी गुजर रही है किसी को क्या पड़ी। शर्म की बात तो ये है कि पहले ये गाली-गलौज गरीब और अशिक्षित लोगों में ही प्रचलित थी। लेकिन आज ये गरीब, अमीर, शिक्षिय, अशिक्षित से लेकर एक बच्चे से लेकर बूढ़े तक में पनप चुकी है। आज कर जरा जरा सी बात पे लोग हर जगह गाली-गलौज करना शुरु कर देते हैं। ये समाज के लिए बेहद शर्मनाक है। इस पर रोक लगाई चाहिए व ऐसे दो कौड़ी के असामाजित तत्वों पर कार्यवाही होनो चाहिए।

मोबाइल कंपनियों द्वारा रिचार्ज के नाम पे लूट

देश दुनिया में साल में 12 माह होते हैं। लेकिन इन मोबाइल रिचार्ज वालों ने अपनी अलग ही दुनिया बना रखी है। ये साल में ग्राहकों से 13 महीने का पैसा बसूलते हैं। इन्होंने 30-31 दिन के महीने को घटाकर 28 दिन का रिजार्ज कर रखा है। जनता लुटती रहे लेकिन पड़ी किसको है ?

किन्नरों की समस्या –

देश के किसी भी कोने में जाओ आपको हर जगह भीख मांगते लोग मिल  जाएंगे। लेकिन आप इन्हें मना कर सकते हैं। हमने कई बार बसों व रेल इत्यादि में किन्नरों को मांगते घूमते देखा है। लेकिन इनके मांगने का तरीका अलग होता है। अगर आप इन्हें पैसे न दें तो ये बत्तमीजी, गाली-गलौज एवं अभद्र भाषा का प्रयोग करेंगे। यदि आप अपनी माँ, बहन, बेटी के साथ हैं फिर तो आप शर्म के मारे इन्हें पैसे देने पर मजबूर हो ही जाएंगे।

यदि आपके घर में शादी या कोई और फंक्शन है तब भी ये बिन बुलाए जबरदस्ती घुस आते हैं। फिर में मोटी डिमांड रखते हैं और आपके सभी परिवार और रिश्तेदारों के सामने बहुत ही गंदी और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। इनके विरुद्ध कोई कानून बनाया जाए। जहाँ एक ओर शादी में झाड़ू वाला, हलवाई, फूल वाला, लाइट वाला, टैंट वाला, केटरिंग वाला, घोड़ा बग्गी वाला, लाइट सर पर रखने वाला। ये सब घंटो मेहतन करके 500-1000 रुपये व्यक्ति के हिसाब से कमा पाते हैं। वहीं ये किन्नर आ के बत्तमीजी कर के हजारों रुपये लूट ले जाते हैं। ये जितने झुंड में आते हैं क्या ये मिल के शादी का कोई काम नहीं कर सकते ?

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प्रतियोगी परीक्षाओं की फीस में समानता –

वर्तमान में शिक्षित युवा के लिए बेरोजगारी एक बहुत ही गंभीर समस्या बन चुकी है। गरीब माँ-बात खून पसीने की कमाई से अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। लेकिन यहाँ परीक्षाओं की फीस में इतनी असमानता की बात समझ नहीं आती। एक ओर एक परीक्षा 125 रुपये की फीस ले के करा दी जाती है। वहीं कोई एजेंसी एक परीक्षा के लिए 185, कोई 250 कोई 750 तो कोई 1000 तक बसूल रही है। जब कोई परीक्षा 125 रुपये में कराई जा सकती है फिर बाकी के 850 रुपये प्रति व्यक्ति किसके खाते में जाते हैं ? यदि ऐसी परीक्षा में 10 लाख भी फार्म पड़ गए तो 850×1000000⇒850000000 रुपये का क्या हुआ ?

अतिक्रमण की समस्या –

बढ़ती आबादी के चलते आज पूरा देश इस समस्या से जूझ रहा है। जहाँ भी देखो भीड़-भाड़ और अतिक्रमण की समस्या। इसके लिए ट्रैफिक पुलिस का भी इंतजाम किया गया है। आप देश के किसी कोने में चले जाओ, और कुछ राज्यों में तो हालत ही खराब है। समय समय पर अतिक्रमण हटाओ अभियान भी चलाए जाते रहते हैं।

लेकिन इनमें घोर पक्षपात होता है। ट्रैफिक पुलिस द्वारा गरीब ठेले वाले, रेहड़ी वाले, खोखे वालों पर तो डंडा चला के अतिक्रमण हटवा लिया जाता है। लेकिन आपने टीवी, फ्रिज, कूलर इत्यादि इलेक्ट्रानिक्स की दुकानों पर डंडा चलते शायद ही कभी देखा होगा। ये लोग सड़क का 6-12 फीट तक अतिक्रमण किये होते हैं। अपनी दुकान का आधा सामान तो ये सड़क पर रखे होते हैं। लेकिन इन मोटे लालाओं पर कभी डंडा नहीं चलता। बहुत सी सरकारें पर प्रशासन ईमानदारी का दावा करते हैं लेकिन इन लोगों पर इनकी कृपा क्या लेकर करते हैं ये सभी जानते हैं।

चुनावी खर्चे से आजादी –

देश की आम जनता दिन रात सरकार को टैक्स देकर महंगाई के बोझ तले दबी जा रही है। दूसरी ओर नेता लोग जनता के इस पैसे से खूब भीड़ इकट्ठा कर जनता के पैसे की दोनो हाथों से झूब बर्बादी करते है। आखिर कब तक देश के पैसे को इस तरह बर्बाद किया जाता रहेगा।

धर्म को धंधा बनाने पर प्रतिबंध

आज कल समाज में बहुत से फर्जी संगठन व दल बना लिए गए हैं जो नाम तो धर्म का रखे हैं लेकिन अंदर ही अंदर इनका अलग की धंधा चल रहा होता है। यदि कोई संगठन धर्म के नाम पर बना है तो उसे सिर्फ धार्मिक कार्यों के लिए ही इंगित किया जाना चाहिए। लेकिन आज कल धर्म की ढाल बनाकर कुछ लोग देश में उन्माद फैलाने में लगे हैं।

झूठे वादों वाले नेताओं की अर्हता रद्द हो

आजकल नेता चुनाव से पहले देश की भोली भाली जनता को बहुत से बड़े-बडे़ वादे कर देते हैं। जनता को ऐसे सपने दिखाते हैं कि हमे वोट दो तो आपको ये देंगे, वो देंगे। लेकिन चुनावी मौसम गुजरते ही 5 साल के लिए वो नेता अपने वादों के साथ अपने क्षेत्र तक को भूल जाते हैं।

पानी की बर्बादी रोकें

पृथ्वी पर उपस्थित जल का 97 प्रतिशत समुद्र व महासागरों में है, जो कि पूरी तरह से खारा है। पृथ्वी पर उपस्थित पानी का एक बहुत छोटा सा हिस्सा ही पीने योग्य है। आज कल पानी के तेजी से हो रहे दोहन के चलते भूमिगत जल का स्तर दिन प्रतिदिन तेजी से गिरता जा रहा है।

जब से वाटर पंप आए हैं, लोगों को पानी की कीमत ही नहीं पता। सुबह उठते ही लोग अनगिनत बाल्टी पानी अपने घर के बाहर का हिस्सा धोने में बर्बाद कर देते हैं। शर्म का बीत तो ये है कि ऐसा करने वाले सिर्फ अनपढ़ मूर्ख लोग ही नहीं बल्कि मैने देखा है अच्छे भले पढ़े घर के शिक्षित लोग भी सूबह उठ के खूब पानी बर्बाद करते हैं। ऐसे लोगों पर तो कार्यवाही होनी चाहिए। क्योंकि जल है तो कल है। जल के बिनी जीवन की कल्पनी भी नहीं की जा सकती। जल्दी इस ओर कोई कड़ कदम न उठाया गया तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया पानी की समस्या से जूझ रही होगी।

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