मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक राजकीय पशु, पक्षी, पुष्प, वृक्ष इत्यादि

मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक

मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक – राजकीय पशु, पक्षी, पुष्प, वृक्ष इत्यादि ( Madhya Pradesh ke Rajkeey Prateek ) – मध्य प्रदेश सामान्य ज्ञान की विस्तृत जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक –

  • मध्य प्रदेश का राजकीय पशु – बारहसिंगा
  • मध्यप्रदेश का राजकीय पक्षी – दूधराज (शाह बुलबुल)
  • मध्य प्रदेश का राजकीय वृक्ष – बरगद
  • मध्यप्रदेश का राजकीय पुष्प – लिली
  • मध्य प्रदेश की राजकीय मछली – माहीगीर
  • मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक नदी – नर्मदा
  • मध्य प्रदेश का राजकीय खेल – मलखंभ
  • मध्यप्रदेश का राजकीय फल – आम
  • मध्य प्रदेश के राजकीय प्रतीक फसल – सोयाबीन
  • मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक नृत्य – राय राई
  • मध्यप्रदेश के राजकीय प्रतीक नाट्य – माच (माचा)

मध्य प्रदेश का राजकीय पशु – बारहसिंगा

  • वैज्ञानिक नाम – Rucervus Duvaucelii
  • संघ – रज्जुकी
  • वर्ग – स्तनपायी
  • वंश – रुसर्वस
  • जाति – आर. डुवौचली
  • प्रजाति – ब्रेडरी
  • गण – आर्टिओडैक्टाइला
  • कुल – सर्विडी

बारहसिंगा

बारहसिंगा मध्यप्रदेश का राजकीय पशु है। इसे ‘दलदल के मृग’ के नाम से जाना जाता है। यह हिरण की एक दुर्लभ प्रजाति है। यह गंगा के मैदानों में बहुतायत में पाए जाते हैं। यह राज्य के ‘कान्हा किसली राष्ट्रीय पार्क’ में पायी जाती है। देश में यह उत्तर भारत और मध्य भारत के अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिमी नेपाल में पाया जाता है। बारहसिंगा की प्रजाति पाकिस्तान और बांग्लादेश से विलुप्त हो चुकी है।

बारहसिंगा से तात्पर्य 12 सींगों से नहीं है। दरअसल इसके सींग विकसित होकर एक से दो शाखा में बढ़ते रहते हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से नर में इनकी अधिकतम 10-14 शाखाएं हो जाती हैं। हालांकि कुछ में तो इनकी संख्या 20 तक पहुँच जाती है। वयस्क नर की लम्बाई अधिकतम चार फीस से कुछ अधिक हो सकती है। इनका वजन 170-180 किलोग्राम तक हो सकता है। इसके सींगों की अधिकतम लम्बाई 104.1 सेमी. रिकार्ड की गई है।

गुजरात से बारहसिंगा के एक हजार वर्ष पुराने अवशेष की प्राप्ति हुई है। यह तराई क्षेत्रों में दलदली इलाकों में और  मध्य भारत में वनों के समीप घास के मैदानों में पाये जाते हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र में यह असम में मुख्यतः ‘काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान’ में पाये जाते हैं। इनका प्रजनन काल सितंबर से अप्रैल तक होता है। 240-250 दिनों के गर्भकाल के बाद मादा सितंबर-अक्टूबर में हिरण बच्चों को जन्म देते हैं। इसका जीवनकाल 23 वर्ष तक का होता है।

नर बारहसिंगा के ऊपरी भाग पर बाल लटके होते हैं। मादा का रंग नर की अपेक्षा थोड़ा हल्का होता है। नर बारहसिंगा के सींग हर साल गर्मियों में झड़ जाते है। इसके बाद नवम्बर माह तक पुनः विकसित हो जाते हैं। बाघ, तेंदुआ और जंगली कुत्ते बारहसिंगा के प्राकृतिक शिकारियों की श्रेणी में आते हैं। पहले इनकी संख्या सिंध से लेकर ब्रह्मपुत्र तक संपूर्ण क्षेत्र में थी। परंतु अब ये कुछ ही क्षेत्रों में बचे हैं। प्राकृतिक आवासों का घटना व शिकार इनकी कमी का मुख्य कारण बन रहा है।

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मध्यप्रदेश का राजकीय पक्षी

  • नाम – दूधराज या सुल्ताना बुलबुल
  • अंग्रेजी नाम – Indian Paradise Flycatcher
  • जगत – जंतु
  • संघ – कार्डेटा
  • वर्ग – Aves (पक्षी)
  • गण – Passeriformes
  • कुल – Monarchidae
  • वंश – Terpsiphone
  • जाति – टर्पसिफोनी पैराडाइसाए

दूधराज या सुल्ताना बुलबुल या शाह बुलबुल

‘सुल्ताना बुलबुल’ को साल 1985 में मध्यप्रदेश का राजकीय पक्षी घोषित किया गया था। इसे ‘वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972’ के तहत संकटग्रस्थ प्राजातियों में सूचीबद्ध किया गया है। यह 18 से 22 सेमी. तक का होता है। एक वयस्क दूधराज के पंखों का फैलाव 89 से 92 सेमी. तक का होता है। इसकी पूंछ की लम्बाई इसके शरीर से चार गुना अधिक होती है। परंतु यह सिर्फ नर दूधराज की ही खासियत है। मादा की पूंछ अन्य पक्षियों की भांति सामान्य ही होती है।

उत्तर भारत में यह सफेद रंग का पाया जाता है। अन्य स्थानों पर काले या भूरे पाये जाते हैं। इसकी मूल प्रजाति दक्षिण भारत और श्रीलंका में पायी जाती है। मध्यप्रदेश में यह बहुत ही कम पायी जाती है। ये काफी शोर करने वाले पक्षी हैं जो घने जंगलों में रहना पसंद करते हैं। इसका प्रजनन काल मार्च से जुलाई के बीच होता है। ये सर्दियों में अपना घोसला बनाना शुरु करते हैं। नर एवं मादा दोनो ही मिलकर घोसला बनाते हैं। मादा एक बार में 3-5 अण्डे देती है। 14 से 18 दिन तक अण्डे सेने के बाद इसमें बच्चे निकलते हैं।

मध्यप्रदेश का राजकीय वृक्ष – बरगद

  • नाम – बरगद (वट वृक्ष)
  • वैज्ञानिक नाम – फाइकस वेनगैलेसिस

बरगद

मध्यप्रदेश सरकार ने बरगद को अपना राजकीय वृक्ष घोषित किया है। इसे वट वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। यह एक दीर्घजीवी विस्तृत वृक्ष है। यह अपने तनों में से लटकने वाली जड़ों के लिए अन्य से अलग नजर आता है।

मध्यप्रदेश का राजकीय पुष्प – लिली

  • नाम – लिली
  • कुल – लिलिएसी
  • प्रजातियां – 100 लगभग

राजकीय पुष्प लिली

मध्यप्रदेश सरकार ने ‘लिली’ को अपना राज्य पुष्प घोषित किया है। इसे सफेद लिली भी कहा जाता है। यह बहूत ही सुंदर पुष्प है। इसका प्रयोग सजावट के लिए किया जाता है। औषधीय दृष्टि से भी यह एक बहुपयोगी पुष्प है। इसका रस त्वचा के लिए बेहद उपयोगी होता है। लिली पुष्प की करीब 100 प्रजातियां पायी जाती हैं। ये फूल अधिकांश वसंत ऋतु में खिलते हैं। परंतु बहुत से प्रजातियां होने के कारण यह साल भर किसी न किसी रूप में उपलब्ध है। लिली का मूल निवास दक्षिण पूर्वी एशिया व अमेरिका है।

लिली के पौधे की आयु करीब 5 साल को होती है। इसके पौधे की लम्बाई 2-6 फीट होती है। ये प्रजातियों के अनुसार अलग-अलग रंग के पाये जाते हैं। टाइगर लिली इसकी प्रजाति है, जो नारगी रंग की होती है। इस पर टाइगर की भांति भूरे रंग के धब्बे होते हैं। सफेद लिली को ईस्टर लिली के भी नाम से जाना जाता है। एक पुष्प में 6 पंखुड़ियां होती हैं। यह अपने पराग के लिए कीट पतंगों को आकर्षित करता है। लिली के फूल का रस ‘नेक्टर’ कहलाता है। सफेद और टाइगर लिली में ही सुगंध पायी जाती है। बाकी लिली के पुष्पों में सुगंध नहीं होती। बिल्लियों के लिए लिली के फूल घातक सिद्ध होते हैं।

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मध्यप्रदेश का राजकीय फल – आम

  • नाम – आम
  • वैज्ञानिक नाम – मेंगीफेरा इंडिका
  • जगत – पादप
  • गण – सेपेंडल्स
  • वंश – मेंगीफेरा
  • कुल – एनाकार्डियासीए

आम

आम को मध्यप्रदेश ने अपना राजकीय फल घोषित किया है। मध्यप्रदेश के जबलपुर को मैंगो डिस्ट्रिक्ट के नाम से जाना जाता है। राज्य के अलीराजपुर जिले में 3-4 किलोग्राम के नूरजहाँ किस्म का आम पाया जाता है। यहाँ के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में यह आम पाया जाता है। आम को फलों का राजा कहा जाता है। देश भर में इसे सर्वाधिक पसंद किया जाता है। यह एक रसीला और बेहद स्वादिष्ट फल है। पहले यह सिर्फ भारतीय उपमहाद्वीप में ही पाया जाता था। धीरे-धीरे यह विश्व भर में फैल गया। इसका सर्वाधिक उत्पादन भारत में होता है। भारत आम के कुल वैश्विक उत्पादन का 41 प्रतिशत उत्पादन करता है। आम का पेंड़ बांग्लादेश का राष्ट्रीय पेंड़ है। आम का फल भारत, पाकिस्तान व फिलिपींस का राष्ट्रीय फल है। भारत में लखनऊ (उत्तरप्रदेश), और वेंगुर्ला (महाराष्ट्र) में आम संशोधन केंद्र हैं।

आम की प्रजातियां –

बम्बइया, बनारसी, दशहरी, फजली, चौसा, अल्फांजो, आम्रपाली, रत्ना, मल्लिका, लंगड़ा, हिमसागर, केसर, मलगोवा, जार्दालू, गुलाब खास, सफेदा लखनऊ, रुमानि, वनराज, रत्ना, सिंधु, बादाम, नीलम, मुलगोआ, तोतापरी, पैरी, मालदा, सुपर्णरेखा, सुन्दरी, राजापुरी इत्यादि।

मध्यप्रदेश की राजकीय मछली

  • नाम – माहीशीर
  • वैज्ञानिक नाम – टोरटोर
  • संघ – Chordata
  • वर्ग – Actinopterygii
  • वंश – Tor
  • कुल – Cyprinidae
  • उपकुल – Cyprininae
  • गण – Cypriniformes

राजकीय जलीय जीव

माहीशीर मध्यप्रदेश की राजकीय मछली है। राज्य सरकार ने इसे 2011 में राज्य मछली के रूप में घोषित किया था। यह मध्यप्रदेश राज्य की संरक्षित मछली है। यह राज्य में नर्मदा नदी में मुख्यतः पायी जाती है। पहले नर्मदा में इसकी संख्या 28-30 प्रतिशत थी। जो अब घटकर 4 प्रतिशत के करीब ही रह गई है। इसकी कुल लम्बाई 2.74 मीटर और भार 50 किलोग्राम तक हो सकता है।

सुनहरे रंग की यह मछली मीठे पानी में अधिक मजबूत होती है। यह प्रदूषण को रोकने व पानी को स्वच्छ करने में काफी मददगार होती है। यह स्वच्छ पानी की मछली है। किसी नदी में इस मछली का पाया जाना उसके जल की स्वच्छता को इंगित करता है। नदियों के पानी का दूषित होना भी इस मछली की घटती संख्या का कारण है। भारत के अतिरिक्त यह मछली मलेशिया व इंडोनेशिया में पायी जाती है। यह मछली संकटग्रस्त है और इसके लुप्त होने का भी डर है।

मध्यप्रदेश की राजकीय फसल – सोयाबीन

  • नाम – सोयाबीन
  • वैज्ञानिक नाम – ग्लाइसिस मैक्स

सोयाबीन

मध्यप्रदेश सरकार ने सोयाबीन को अपनी राजकीय फसल घोषित किया है। मध्यप्रदेश सोयाबीन का एक बड़ा उत्पादक राज्य है। सोयाबीन उत्पादन में यह भारत में पहले स्थान पर है। भारत के कुल सोयाबीन का 80 प्रतिशत उत्पादन अकेले मध्यप्रदेश में ही होता है। इस कारण इस राज्य को सोयास्टेट भी कहा जाता है।

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मध्य प्रदेश का राजकीय नदी – नर्मदा

मध्यप्रदेश की राजकीय नदी नर्मदा

नर्मदा को मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कहा जाता है। नर्मदा मध्यप्रदेश की प्रमुख नदी है। इसे रेवा के नाम से भी जाना जाता है। यह राज्य की सबसे बड़ी नदी है। यह भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवीं सबसे लंबी नदी है। नर्मदा नदी की कुल लम्बाई 1312 किलोमीटर है। इसमें से 1077 किलोमीटर मध्यप्रदेश में है। इसे राज्य सरकार ने राजकीय नदी घोषित किया है। अनूपपुर जिले में स्थित अमरकंटक का नर्मदा कुण्ड नर्मदा का उद्गम स्थल है। यह विंध्याचल और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के पूर्व संधि स्थल पर स्थित है। यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच की पारंपरिक सीमा बनाती है। अपने उद्गम स्थल से निकलकर 1312 किलोमीटर का सफर तय कर यह गुजरात के भरूच जिले में खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में गिरती है। यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली नदी है।

मध्यप्रदेश का राजकीय खेल – मलखंब

राजकीय खेल मलखंब

मलखंब को मध्यप्रदेश ने अपने राजकीय खेल के रूप में घोषित किया है। यह मैदान में एक खंभा गाड़कर उस पर करतब दिखाने का खेल हे। यह एक बेहतरीन व्यायाम व कसरत वाला खेल है। यह भारत का एक पारंपरिक खेल है। इससे शरीर बलबान, लचीला और संतुलित होता है। यह खेल न्यूनतम समय में पूरे शरीर का अधिकतम व्यायाम करा देता है। मलखम्भ का प्राचीनतम साक्ष्य चोल काल में 1135 ई. का मिलता है। भारतीय क्रांतिकारी तात्या टोपे और राजी लक्ष्मीबाई ने भी यह खेल सीखा था। इसमें लकड़ी का एक मजबूत खंभा होता है। ये शीशम या सागौन की लकड़ी से बना होता है। इसकी लम्बाई 8.5 फीट (2.6 मीटर) होती है। इस खंभे में अरंडी का तेल लगाया जाता है। यह पहलवान की मजबूत पकड़, ताकत, संतुलन और लचीलेपन का खेल है।

मध्यप्रदेश का राजकीय नृत्य – राय राई

राय राई को मध्यप्रदेश ने अपना राजकीय नृत्य घोषित किया है। यह राज्य के मुंडन के क्षेत्र में अत्यधिक प्रचलित है। इस नृत्य की मुख्य नर्तकी को बेड़नी कहा जाता है। जो इस नृत्य की प्रमुख किरदार व आकर्षण का केंद्र होती है। प्रमुख रूप से इसका आयोजन बच्चे के जन्म और विवाह के अवसर पर ग्रामीण क्षेत्रों में किया जाता है।

मध्यप्रदेश का राजकीय नाट्य – माच (माचा)

माचा को मध्यप्रदेश ने अपना राजकीय नाट्य घोषित किया है। यह पौराणिक गाथाओं व संस्कृति पर आधारित नाट्य है। उज्जैन को इसका उद्गम स्थल माना जाता है। इसकी प्रस्तुति खुले मैदान में ऊँचे मंच पर की जाती है। जिससे मैदान में बैठे सभी लोग ठीक से देख सकें। इसमें ढोलक व सारंगी का महत्वपूर्ण योगदान है। यह मालवा क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है।

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