केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख राजकीय पशु पक्षी इत्यादि

केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख

केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख राजकीय पशु पक्षी इत्यादि – 31 अक्टूबर 2019 को लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के रूप में अस्तित्व में आया। इससे पूर्व ये जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। इसकी राजधानी लेह है।

केंद्रशासित प्रदेशलद्दाख
राजधानीलेह
उपराज्यपालराधाकृष्ण माथुर
कुल क्षेत्रफल1,66,698 वर्गकिमी.
भारत के नियंत्रण में59,146 वर्गकिमी.
जनसंख्या2,74,289
जनघनत्व4.6 व्यक्ति
जिले2
जिलों के नामलेह, कारगिल
आधिकारिक भाषाएंहिंदी,लद्दाखी,तिब्बती
वाहन पंजीकरणLA
राजकीय पशुहिम तेंदुआ
राजकीय पक्षीकाली गर्दन वाला सारस
आधिकारिक वेबसाइटhttps://ladakh.nic.in

लद्दाख राजकीय पशु पक्षी

लद्दाख का राजकीय पशु – ‘हिम तेंदुआ’

  • पैंथरा यूनिया
  • संघ – रज्जुकी
  • वर्ग – स्तनधारी
  • कुल – विडाल
  • उपकुल – पैंथर
  • वंश – यूनसिया

हिम तेंदुआ

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के निर्माण के दो वर्ष पश्चात लद्दाख ने ‘हिम तेंदुआ’ को अपना राजकीय पशु घोषित किया है। खाद्य श्रंखला में ये शीर्ष शिकारी की भूमिका में आते हैं। यह 1.4 मीटर लम्बा होता है। इसकी पूँछ 90-100 सेमी. लम्बी होती है, इस पर धारियां बनी होती हैं। हिम तेंदुए का भार 75 किलोग्राम तक हो सकता है। यह बिल्ली परिवार की एकमात्र प्रजाति है जो दहाड़ नहीं सकती। ये केवल गुर्रा-घुरघुरा सकता है। हिम तेंदुए अधिकांश रात्रि में सक्रिय होते हैं।

हिम तेंदुए अकेले रहने वाले जीवों में से हैं। ये वीराने इलाकों में भी अकेले रह सकते हैं। मादा का गर्भकाल 90-100 दिन का होता है। इसके बाद ये 2-3 शावकों को जन्म देती है। मध्य एशिया व दक्षिण एशिया के पर्वतीय क्षेत्र इसके प्राकृतिक आवास हैं। ये केवल एशिया महाद्वीप पर ही पाए जाते हैं। भारत में ये जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, व अरुणाचल प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र में पाये जाते हैं। भारत में हिम तेदुआ की वैश्विक आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा है। हेमिस, लद्दाख को विश्व हिम तेंदुआ राजधानी कहा जाता है। हेमिस नेशनल पार्क में हिम तेंदुओं की अच्छी उपस्थिति है।

परंतु वर्तमान में इस प्रजाति के ऊपर तमाम तरह के खतरे भी मंडरा रहे हैं। इनके शिकार भी बहुत कम बचे हैं। इसके अतिरिक्त इनके खुद के शिकार और आवास में मानवीय घुसपैठ भी कारण है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में स्थान दिया गया है। साल 2017 में इसे संकटग्रस्त से कमजोर की स्थिति में डाल दिया गया। भारत में पहला हिम तेंदुआ सर्वेक्षण 2019 में आयोजित किया गया था।

प्रोजेक्ट हिम तेंदुआ –

साल 2009 में हिम तेंदुआ परियोजना की शुरुवात की गई। इसे हिम तेंदुआ की आबादी वाले राज्यों में शुरु किया गया। जैसे – हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश।

अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस –

23 अक्टूबर को हर साल विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय हिम तेंदुआ दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने की शुरुवात साल 2014 में की गई थी। पहला विश्व हिम तेंदुआ दिवस 23 अक्टूबर 2014 को मनाया गया था। साल 2015 को हिम तेंदुए के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में चिह्नित किया गया था।

वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र कार्यक्रम –

किर्गिस्तान सरकार ने हिम तेंदुआ के संरक्षण के लिए ‘वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र कार्यक्रम’ की शुरुवात की थी। भारत भी इस कार्यक्रम में शामिल हुआ और हस्ताक्षर किये। साथ ही चीन, रूस, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भूटान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, मंगोलिया व कजाकिस्तान ने भी इस पर हस्ताक्षर किये।

हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र –

भारत के पहले हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र के निर्माण की योजना बनाई गई है। इसे उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थापित किया जाएगा। इसे गंगोत्री नेशनल पार्क से लगे भैरों घाटी लंका में बनाया जाएगा। इसका डिजाइन मार्च 2021 में तैयार कर लिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह पूरी तरह ईको फ्रैंडली होगा। इसे बनाने के लिए ईंट के स्थान पर पत्थर, मिट्टी व लकड़ी का प्रयोग किया जाएगा। इसे बनाने में करीब सवा करोड़ रुपये की लागत आयेगी। इसे बनने के बाद पर्यटक भी आकर्षित होंगे।

लद्दाख का राष्ट्रीय पक्षी – ‘ब्लैक नैक्ड क्रेन’

  • नाम – काली गर्दन वाला सारस
  • अंग्रेजी नाम – Black Necked Crane
  • वैज्ञानिक नाम – ग्रस निग्रीकोलिस

Black Necked Crane

केंद्र शासित प्रदेश बनने के दो वर्ष पश्चात लद्दाख ने ‘ब्लैक नैक्ड क्रेन’ को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया है। इसे तिब्बती क्रेन ने नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि ये मुख्य रूप से तिब्बत के पठार में रहता है। यह पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में पाया जाता है। यह एक सर्वाहारी पक्षी है। यह फल, अनाज के साथ कीट पतंगों व घोंघों का भी भक्षण करता है। इसकी ऊँचाई लगभग 1.35 मीटर होती है। पंखों का फैलाव 2-2.5 मीटर होता है। इसका वजन 6-8 किलोग्राम होता है।

सामान्यतः यह जोड़ियों में पाया जाता है। नर व मादा दोनों ही क्रेन लगभग बराबर होते हैं। लेकिन मादा नर से थोड़ी छोटी होती है। यह तिब्बती पठार, चीन के सिचुआन, व भारत में लद्दाख में पाया जाता है। यह सर्दियों का मौसम कम ऊँचाई वाले स्थानों पर बिताता है। लेकिन प्रजनन उच्च ऊँचाई वाली आर्द्रभूमि पर करता है। ये सर्दियों के मौसम में भूटान व अरुणाचल प्रदेश में जाता है। इसके लिए सबसे बड़ा खतरा जंगली कुत्ते हैं। जो इनके अण्डों व बच्चों को खा जाते हैं।

केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख –

वर्तमान में यह भारत का सबसे बड़ा केंद्रशासित प्रदेश है। केंद्रशासित प्रदेश के रूप में इसका गठन 31 अक्टूबर 2019 को किया गया था। इससे पहले यह जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था। यह भारत का दूसरा सबसे कम आबादी वाला केंद्रशासित प्रदेश है। यह हिमालय की काराकोरम रेंज में सियाचिन ग्लेशियर से उत्तर में अवस्थित है। लद्दाख के पूर्व में अक्साइ चिन का मैदान है जिस पर भारत अपने अधिकार का दावा करता है। परंतु साल 1962 से यह चीन के नियंत्रण में है। भारत गिलगिल बाल्टिस्तान पर भी अपना हक मानता है। परंतु ये वर्तमान में पाकिस्तान के नियंत्रण मे है। लद्दाख का सबसे बड़ा शहर लेह है। सिंधु, नुब्रा और श्योक नदी घाटियां लेह जिले में आती हैं। वहीं कारगिल जिले में सुरु, जास्कर और द्रास नदी घाटियां आती हैं।

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