क्या अंतर है – What Is The Difference Between ?

क्या अंतर है – What Is The Difference Between ?

राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में क्या अंतर है ?

What is the difference between National Anthem and National Song ?

  • भारत का राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ है। वहीं भारत का राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ है।
  • भारत का राष्ट्रगान रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीतांजलि से लिया गया है। वहीं राष्ट्रगीत बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनन्दमठ से लिया गया है।
  • राष्ट्रगान को गाने में कुल 52 सेकेंड का समय लगता है। वहीं राष्ट्रगीत को गाने में 1 मिनट 5 सेकेंड का समय लगता है। राष्ट्रगान को गाने की संक्षिप्त अवधि 20 सेकेंड है। इसमें राष्ट्रगान की प्रथम व अंतिम पंक्तियां गायी जाती हैं।
  • राष्ट्रगीत को पहली बार साल 1896 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। जब्कि राष्ट्रगान को पहली बार 27 दिसंबर 1911 ई. को कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था।
  • 24 जनवरी 1950 को संविधानसभा ने जन-गण-मन को भारत का राष्ट्रगान स्वीकर किया। वहीं वंदे मातरम् को 26 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्रगीत स्वीकार किया गया।
  • राष्ट्रगान की वर्तमान संगीतमय धुन कैप्टन रामसिंह ठाकुर ने बनाई।

दिल्ली और नई दिल्ली में क्या अंतर है ?

What is the difference between Delhi and New Delhi ?

उत्तर – दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है। जब्कि नई दिल्ली एक जिला है।

वर्तमान में दिल्ली की राजधानी नई दिल्ली ही है।

मुम्बई और बम्बई में क्या अंतर है ?

What is the difference between Mumbai and Bombay ?

अधिकांश लोगों को लगता है कि मुम्बई को पहले बम्बई कहते थे। उनको लगता है कि कल का बम्बई ही आज की मुम्बई है। परंतु ऐसा नहीं है। वर्तमान में मुम्बई एक शहर है। यह महाराष्ट्र में अवस्थित है। वर्तमान में मुम्बई महाराष्ट्र की राजधानी है। परंतु पहले जिसे बम्बई कहा जाता था वह आधुनिक मुम्बई से कहीं अधिक विस्तृत था। बम्बई प्रेसिडेंसी के अंतर्गत आधुनिक महाराष्ट्र और गुजरात राज्य के साथ साथ आस-पास का भी काफी क्षेत्र सम्मिलित था।

तारे, ग्रह और उपग्रह में क्या अंतर है ?

What is The difference between Planet ant Satellite ?

तारों के पास स्वयं की ऊर्जा व प्रकाश होता है।

किसी आकाशीय पिण्ड के ग्रह होने के लिए आवश्यक है कि….

  • उसका अपना गुरुत्वाकर्षण हो, जिस कारण वह..
  • …लगभग गोलाकार प्राप्त कर चुका हो।
  • वह सिर्फ अपने तारे की ही परिक्रमा करता हो।
  • ग्रहों में स्वयं का प्रकाश नहीं होता।
  • ये अपने तारे से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
  • किसी अन्य ग्रह के परिक्रमण पथ का अतिक्रमण न करता हो।
  • आस-पास अन्य खगोलीय पिण्डों की भीड़भाड़ न हो।

वहीं एक उपग्रह अपने तारे के साथ साथ अपने ग्रह की भी परिक्रमा करता है।

वर्तमान में प्राकृतिक उपग्रह के साथ कृत्रिम उपग्रह (सैटेलाइट) भी प्रचलन में आ गए हैं।

महाद्वीप और महासागर में क्या अंतर है ?

What is The difference between Continent and Ocean ?

पृथ्वी पर अपस्थित सबसे बड़े स्थलखण्डों को महाद्वीप की संज्ञा दी गई है। वहीं पृथ्वी पर उपस्थित सबसे विस्तृत जलराशि को महासागर की संज्ञा दी गई है। पृथ्वी पर कुल 7 महाद्वीप एशिया, अफ्रीका, उत्तर अमेरिकी, दक्षिण इमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, व ऑस्ट्रेलिया है। प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, व आर्कटिक पृथ्वी के महासागर हैं।

कपि और मानव में क्या अंतर है ?

What is the Difference between Apes and Men ?

कपियों का प्रमुख वास वृक्षों पर होता है और मानवों का स्थलीय।

कपि की अगली भुचाएं लम्बी होती है। मानवों की अगली भुजाएं छोटी होती हैं।

कपियों की मादा में स्तन उभरे हुए नहीं होते। मानव मादाओं में स्तन उभरे हुए होते हैं।

कपि में स्पष्ट व तर्कसंगत वाणी का अभाव होता है। मानव में स्पष्ट व तर्कसंगत वाणी की क्षमता होती है।

कपि की भौंहें मोटी व ऊंची होती हैं, जब्कि मानवों की भौंहें अपेक्षाकृत पतली व कम ऊंची होती हैं।

कपियों में महारन्ध्र खोपड़ी के पीछे होता है। मानवों में खोपड़ी के नीचे होता है ओर खोपड़ी कशेरुक दण्ड पर सधी रहती है।

कपियों में शिशु व बाल्यावस्था छोटी होती है। मानव में शिशु व बाल्यावस्था लम्बी होती है।

कपि के होंट बाहर की ओर घूमे हुए नहीं होते, मानवों के होते हैं। कपि के ऊपरी होंट में खांच नहीं होता। मानवों के ऊपरी होंठ के मध्य में खांच होती है।

कपि की नाक चपटी व चेहरा आगे की ओर निकला हुआ होता है। मानवों की नाक ऊंची व चेहरा सीधा होता है।

सजीव और निर्जीव में क्या अंतर है ?

Question :- What is the difference Between Living and Non-Lining ?

सजीवों का निर्माण कोशिकाओं से होता है। कोशिका सजीवों की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई है। वहीं निर्जीवों की बनावट अकोशिकीय होती है।

सजीवों में जीवद्रव्य पाया जाता है। निर्जीवों में जीवद्रव्य का अभाव होता है।

सजीव में उत्सर्जन क्रिया होती है। जो कि निर्जीवों में नहीं होती।

सजीवों में अनुकूलन की क्षमता होती है। निर्जीवों में अनुकूलन की क्षमता नहीं होती।

अन्तः व बाह्य वातावरण में होने वाले परिवर्तनों (उद्यीपनों) को ग्रहण करने व प्रतिक्रिया करने की क्षमता सजीवों में होती है, निर्जीवों में नहीं। अर्थात निर्जीवों में उत्तेजनशीलता का गुण नहीं होता।

सजीव में आंतरिक व निश्चित अनुपात में वृद्धि होती है। निर्जोवों में सामान्यतः वृद्धि नहीं होती। कुछ निर्जीवों में बाह्य व समान अनुपात में वृद्धि होती है।

आंतरिक ऊर्जा के कारण सजीवों में गमन या गति होती है। निर्जीवों में सामान्यतः गमन या गति नहीं होती।

अपने समान संतानोत्पत्ति की क्षमता सजीवों में होती है। निर्जीवों में जनन क्षमता नहीं होती।

सजीवों में जन्म मृत्यु का निश्चय चक्र चलता रहता है। निर्जीवों में जन्म-मृत्यु चक्र नहीं होता।

सजीव की आकृति व आकार निश्चित होते हैं। निर्जीव की आकृति व आकार अनिश्चित होते हैं।

सजीवों में उपापचय (उपचय व अपचय) की क्रिया होती है। निर्जीवों में उपापचय की क्रिया नहीं होती।

जैविक क्रियाओं के लिए सजीव अपनी ऊर्जा भोजन से प्राप्त करते हैं। निर्जीवों में पोषण की क्रिया नहीं होती।

सजीव कोशिकाओं को ऊर्जा भोज्य पदार्थों के जैव रासायनिक ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है। इस क्रिया को श्वसन क्रिया कहा जाता है। निर्जीवों में श्वसन क्रिया नहीं होती है।

बैक्टीरिया और वायरस में क्या अंतर है ?

जीवाणु और विषाणु में क्या अंतर है ?

What is The Difference between Bacteria and Virus ?

बैक्टीरिया (Bacteria) को हिंदी में जीवाणु कहा जाता है। वायरस (Virus) को हिंदी में विषाणु कहा जाता है।

वायरस को सजीव व निर्जीवों के बीच की कड़ी माना जाता है। वहीं बैक्टीरिया सरललम आद्य (Primitive) हैं।

जीवाणु स्वपोषी या परपोषी (परजीवी, मृतोपजीवी, सहजीवी) होते हैं। विषाणु पूर्णतः परपोषी होते हैं।

बैक्टीरिया की कोशिकाएं पूर्वकेंद्रकीय होती हैं। वायरस में कोशिकीय संरचना नहीं होती।

बैक्टीरिया में जीवद्रव्य पाया जाता है। वायरस में जीवद्रव्य  नहीं होता।

जीवाणुओं (बैक्टीरिया) में DNA व RNA  होते हैं। वहीं वायरस में DNA या RNA होता है।

बैक्टीरिया कोशिका के बाहर भी प्रजनन करते हैं। अतः इनका कृत्रिम संवर्धन संभव है। परंतु वायरस केवल जीवित कोशिका में ही प्रजनन करते हैं।

बैक्टीरिया लाभदायक या हानिकारक दोनो ही हो सकता है। वायरस रोगजनक (हानिकारक) होते हैं।

प्रोकैरियोटिक व यूकैरियोटिक कोशिका में अंतर –

1 – प्रोकैरियोटिक कोशिका की कोशिका भित्ति प्रोटीन तथा कार्बोहाइड्रेट की बनी होती है। यूकैरियोटिक कोशिका की सैल्यूलोज की बनी होती है।

2 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में माइट्रोकाण्ड्रिया अनुपस्थित रहता है। यूकैरियोटिक कोशिका में यह उपस्थित रहता है।

3 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में कोशिका विभाजन अर्द्धसूत्री प्रकार का होता है। यूकैरियोटिक कोशिका में यह अर्द्धसूत्री या समसूत्री प्रकार को होता है।

4 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में श्वसन प्लाज्मा झिल्ली द्वारा होता है। यूकैरियोटिक कोशिका में श्वसन माइटोकाण्ड्रिया द्वारा होता है।

5 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में DNA एकल सूत्र के रूप में होता है। यूकैरियोटिक कोशिका में पूर्ण विकसित व दोहरे सूत्र के रूप में होता है।

6 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में गॉल्जीकाय अनुपस्थित होते हैं। यूकैरियोटिक कोशिका में ये उपस्थित होते हैं।

7 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में लिंग प्रजनन नहीं पाया जाता। यूकैरियोटिक कोशिका में लिंग प्रजनन पाया जाता है।

8 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में प्रकाश संश्लेशण थायलेकाइड में होता है। यूकैरियोटिक कोशिका में प्रकाश संश्लेषण क्लोरोप्लास्ट में होता है।

9 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में केंद्रक झिल्ली अनुपस्थित रहती हैं। यूकैरियोटिक कोशिका में ये उपस्थित होती हैं।

10 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में केंद्रिका अनुपस्थित रहती हैं। यूकैरियोटिक कोशिका में ये उपस्थित होती हैं।

11 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में सेंट्रियोल अनुपस्थित रहती हैं। यूकैरियोटिक कोशिका में ये उपस्थित होती हैं।

12 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में कशाभिका केवल एक तंतु के रूप में होता है। यूकैरियोटिक कोशिका में कुल 11 तंतु होते हैं।

12 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में राइबोसोम 70S प्रकार के होते हैं। यूकैरियोटिक कोशिका में राइबोसोम 80S प्रकार के होते हैं।

13 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में लाइसोसोम अनुपस्थित होते हैं। यूकैरियोटिक कोशिका में ये उपस्थित होते हैं।

14 – प्रोकैरियोटिक कोशिका में इण्डोप्लाज्मिक रेटीकुलम अनुपस्थित रहता है। यूकैरियोटिक कोशिका में यह उपस्थित रहता है।

भारत की बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं

भारत की बहुउद्देश्यीय परियोजनाएं :- भारत की कृषि व्यवस्था मानसून पर आधारित थी। जिस साल समय पर मानसून आ जाता था, तो फसल अच्छी हो जाती थी। परंतु मानसून वक्त पर न आने पर फसलें बर्बाद हो जाया करती थीं या बहुत कम उत्पादन हुआ करता था। कृषि की नियमितता व उत्पादन बढ़ाने हेतु सिंचाई व्यवस्था की आवश्यकता पड़ी। भारत की सिंचाई परियोजनाओं को तीन भागों में बांटा गया है –

  • लघु सिंचाई परियोजनाएं – 2000 हेक्टेयर से कम क्षेत्र को सिंचित करने वाली परियोजनाएं।
  • मध्यम सिंचाई परियोजनाएं – 2000 से 10000 हेक्टेयर तक के क्षेत्र को सिंचित करने वाली परियोजनाएं।
  • वृहत् सिंचाई परियोजनाएं – 10000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचित करने वाली परियोजनाएं।

दामोदर घाटी परियोजना –

  • यह स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देश्यीय परियोजना है।
  • 1948 ई. में दामोदर घाटी निगम की स्थापना की गई।
  • इसका आधार संयुक्त राज्य अमेरिका की टेनेसी घाटी परियोजना (1933 ई.) थी।
  • दामोदर घाटी झारखंड व पश्चिम बंगाल राज्यों में फैली है।
  • छोटानागपुर की पहाड़ियों से निकलकर दामोदर नदी हुगली नदी (प. बंगाल) से मिल जाती है।
  • इस परियोजना के तहत कोनार, तिलैया, मैथान व पंचेत पहाड़ी पर बांध बनाए गए।
  • जबकि चंद्रपुर, बोकारो, दुर्गापुर, व पतरातू में विद्युत गृह बनाए गए।

भाखड़ नांगल परियोजना –

  • भाखड़ नांगल परियोजना पंजाब व हिमाचल प्रदेश में सतलज नदी पर अवस्थित है।
  • यह देश की सबसे बड़ी नदी घाटी बहुउद्देश्यीय परियोजना है।
  • भाखड़ नांगल बांध विश्व का सबसे ऊँचा (226 मीटर) गुरुत्वीय बांध है।
  • गोविंद सागर झील इसी बांध के पीछे (हिमाचल प्रदेश में) अवस्थित है।
  • इस परियोजना का लाभ पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली को प्राप्त होता है।

रिहन्द बांध परियोजना –

  • रिहंद बांध परियोजना उत्तर प्रदेश में सोन की सहायक नदी रिहंद पर बनाई गई है।
  • गोविंद बल्लभ पंत सागर नाम की कृत्रिम झील को इसी बांध के पीछे बनाया गया है।
  • यह भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
  • यह उत्तर प्रदेशमध्य प्रदेश की सीमा पर अवस्थित है।

हीराकुंड बांध परियोजना –

  • इसे ओडिशा राज्य में संभलपुर के निकट महानदी पर बनाया गया है।
  • यह संसार का सबसे लम्बा बांध है।

इंदिरा गाँधी परियोजना –

  • इंदिरा गाँधी (राजस्थान नहर) परियोजना में रावी और व्यास नदी का जल सतलज नदी में लाया गया है।
  • व्यास नदी पर पौंग बांध बनाया गया है।
  • इसका उद्देश्य नए क्षेत्र को सिंचित कर कृषि योग्य बनाना है।
  • यह विश्व की सबसे लम्बी नहर है।
  • मुख्य नहर को इंदिरा नहर के नाम से जाना जाता है।
  • इससे राजस्थान राज्य के जैसलमेर, बीकानेर, व गंगानगर जिलों में सिंचाई की जाती है।
  • यह भारत का सबसे बड़ा कमान क्षेत्र विकसित करता है।

चंबल परियोजना –

  • यह राजस्थान व मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है।
  • इसके माध्यम से यमुना की सहायक चंबल नदी के जल का उपयोग किया गया है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश में गाँधी सागर बांध बनाया गया है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत राजस्थान में जवाहर सागर बांध, राणा प्रताप सागर बांध और कोटा बैराज बनाया गया है।
  • चंबल नदी की द्रोणी में मृदा का संरक्षण करना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है।

केन-बेतबा लिंक परियोजना –

  • प्रायद्वीपीय नदी विकास योजना के तहत इसका शुभारंभ 25 अगस्त 2005 को किया गया था।
  • इस परियोजना को अमृत क्रांति के नाम से शुरु किया गया था।
  • यह देश की प्रमुख नदियों को जोड़ने की ओर एक सफल पहल है।
  • यह राज्यों को जल विवाद निपटाने के लिए भी प्रेरित करेगी।
  • उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश की इस सम्मिलित योजना में केन-बेतवा नदियों को जोड़ा गया है।
  • इसके तहत दोनो राज्यों के पानी की कमी वाले क्षेत्रों में पेयजल व सिंचाई की सुविधा की गई।
  • यह 4263 करोड़ रुपये लागत की परियोजना है।
  • इसका लाभान्वित क्षेत्र 8.81 लाख हेक्टेयर आंका गया है।
  • इस परियोजना के तहत 72 मेगावाट विद्युत उत्पादन की बात कही गई।

गंडक परियोजना –

  • गंडक परियोजना नेपाल की सहायता से शुरु की गई है।
  • इसमें नहर गंडक पर बने बाल्मीकिनगर बैराज से निकलती है।

कोसी परियोजना –

  • कोसी नदी परियोजना बिहार से संबंधित है।
  • इसे नेपाल के सहयोग से पूरा किया गया है।
  • अपनी विनाशकारी बाढ़ों के कारण कोसी नदी को उत्तरी बिहार का शोक कहा जाता है।

सरदार सरोवर परियोजना –

  • यह राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र की संयुक्त परियोजना है।
  • यह नर्मदा और उसकी सहायक नदियों पर अवस्थित है।
  • सरकार ने इस पर 30 बड़े, 135 मध्यम और 3000 लघु बांधों को बनाने की योजना बनाई।
  • नर्मदा नदी के कुल अपवाह क्षेत्र का 86 प्रतिशत अकेले मध्यप्रदेश में ही है।
  • महाराष्ट्र में नर्मदा का 12 प्रतिशत हिस्सा और गुजरात में मात्र 2 प्रतिशत है।

नागार्जुन परियोजना –

  • नागार्जुन परियोजना आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर बनाई गई है।
  • इसका नामकरण बौद्ध विद्वान नागार्जुन के नाम पर नागार्जुन सागर किया गया है।

किशनगंज परियोजना –

  • जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी पर 330 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना बनाई गई।
  • इसके तहत 21 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग बनाने की योजना बनाई गई।
  • पाकिस्तान ने इस परियोजना को सिंधु जल समझौता 1960 का उल्लंघन माना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने सितंबर 2011 में बांध निर्माण की अनुमति दे दी। परंतु यह निर्देश भी दिया कि भारत इस नदी पर ऐसा कोई स्थाई निर्माण नहीं कर सकता जिससे नदी जल प्रवाह बाधित हो।

तुंगभद्रा परियोजना –

  • यह आंध्रप्रदेश व कर्नाटक की संयुक्त परियोजना है।
  • इसे कृष्णी की सहायक नदी तुंगभद्रा पर मल्लपुर के निकट बनाया गया है।

मयुराक्षी परियोजना –

  • यह छोटानागपुर पठार के उत्तर-पूर्वी भाग पर अवस्थित है।
  • इसे यहाँ के मेंसजोर नामक स्थान पर मयूराक्षी नदी पर बनाया गया है।
  • इसके माध्यम से झारखंड राज्य को बिजली से लाभान्वित करने की परियोजना बनाई गई है।
  • साथ ही प. बंगाल को सिंचाई नहरों से लाभान्वित करना भी इसका उद्देश्य है।
  • इसे कनाडा बांध के नाम से भी जाना जाता है।

शरावती परियोजना –

  • इस परियोजना को भारत के सबसे ऊँचे जलप्रपात महात्मा गाँधी जलप्रपात (जोग) पर बनाया गया है।
  • यहाँ से बेंग्लुरु के औद्योगिक क्षेत्र और गोवा व तमिलनाडु को भी बिजली की आपूर्ति की जाती है।

कोयना परियोजना –

  • इसे कृष्णा की सहायक कोयना नदी पर महाराष्ट्र में बनाया गया है।
  • यहाँ से मुम्बई-पुणे औद्योगिक क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति की जाती है।

बगलिहार परियोजना –

  • इसे जम्मू-कश्मीर में चिनाव नदी पर बनाया गया था।
  • यह 450 मेगावाट की एक जल विद्युत परियोजना है।
  • पाकिस्तान इसके निर्माण को साल 1960 के सिंधु जल समझौते का उल्लंघन मानता है।

मुल्ला पेरियार बांध विवाद –

  • इस बांध पर तमिलनाडु व केरल के बीच विवाद है।
  • यह बांध केरल राज्य के उडुक्की जिले में पेरियार नदी पर बना है।
  • इसके जल का उपयोग तमिलनाडु के कृषक खेतों की सिंचाई हेतु करते हैं।
  • केरल की चिंता इसकी सुरक्षा के संबंध में है।
  • इसके पुराने होने के कारण इसके टूटने की आशंका के चलते केरल नया बांध बनाने के पक्ष में है।
  • क्योंके केरल के निचले भाग में रहने वाले लाखों लोगों का जीवन संकट में पड़ सकता है।
  • दूसरी ओर तमिलनाडु कहता है कि नया बांध बनाने से लाखों किसानों के हित प्रभावित होंगे।

राष्ट्रीय जल मिशन –

  • 6 अप्रैल 2011 को राष्ट्रीय जल मिशन को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • इसका उद्देश्य जल संरक्षण के मुद्दे को जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करना था।
  • इस मिशन के अंतर्गत कुल 5 लक्ष्य निर्धारित किये गए –
  1. सार्वजनिक क्षेत्र में जल का एक व्यापक डाटाबेस तैयार करना।
  2. जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तनों के प्रभावों का आंकलन करना।
  3. आम लोगों व राज्यों को जल संरक्षण हेतु प्रोत्साहित करना।
  4. जल के उपयोग की प्रभाव क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाना।
  5. जल संचयन हेतु जलाशयों के स्तर को बढ़ावा।