वैश्यावृत्ति (Prostitution)

वैश्यावृत्ति

वैश्यावृत्ति (Prostitution) : अर्थ, परिभाषा, कारण व प्रकार, इतिहास, विस्तार, नियंत्रण के प्रयत्न इत्यादि।

Prostitution या वैश्यावृत्ति का अर्थ –

सामान्य शब्दों में कहा जाए तो वैश्यावृत्ति वह अवस्था है जिसमें धन लेकर यौन संबंध बनाए जाते हैं। इसमें दो व्यक्तियों के बीच किसी भी प्रकार के भावनात्मक लगाव के लिए कोई स्थान नहीं होता। इसमें भावनात्मक उदासीनता व प्रेम की शून्यता पायी जाती है। अर्थात् सिर्फ धन के लिए बनाए गए यौन संबंधों को वैश्यावृत्ति के श्रेणी में रखा जाता है। परंतु वर्तमान में धन से आशय केवल रुपये पैसे से ही नहीं। अपितु मोबाइल फोन, लैपटॉप, कार, या घर जैसी महंगी वस्तुएं भी शामिल हैं। किसी वैश्या के एक या अनेक ग्राहक हो सकते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार की वैश्यावृत्ति में लिप्त है।

वैश्यावृत्ति की परिभाषा –

Geoffrey के अनुसार, “वैश्यावृत्ति को किसी स्त्री द्वारा एक ऐसी आदत अथवा बार बार स्थापित किये जाने वाले यौन संबंधों के बारे में परिभाषित किया जा सकता है, जो आर्थिक लाभ के लिए स्वच्छन्दतापूर्वक किये जाते हैं। ”

Elliott और Merrill के अनुसार, “वैश्यावृत्ति वह अवैध यौन संबंध है जो प्रेम की भावना से रहित होकर आर्थिक लाभ के लिए अनेक व्यक्तियों से स्थापित किया जाता है।”

Clinard के अनुसार, “वैश्यावृत्ति एक भेदरहित तथा धन के लिए किया गया यौन संबंध है जिसमें भावनात्मक उदासीनता होती है।”

वैश्यावृत्ति का इतिहास –

यह समाज की वह कुरीति है जिसका इतिहास सदियों पुराना है। यह वृत्ति सदियों से चली आ रही है। कई बार इसे प्रतिबंधित भी किये जाने के प्रयास किये जाते रहे हैं। परंतु यह आज भी प्रचलित है।

वैश्यावृत्ति का विस्तार –

वर्तमान समय की बात करें तो दुनिया का शायद ही कोई हिस्सा इससे अछूता हो। कई देशों में तो इसे कानूनी रूप भी प्रदान किया जा चुका है।

Prostitution या वैश्यावृत्ति के प्रकार –

  • कोठे की वैश्याएं
  • कॉल गर्ल्स
  • होटलों की वैश्याएं
  • गुप्त वैश्याएं
  • रखैल वैश्याएं

कोठे की वैश्याएं –

इस प्रकार की वैश्यावृत्ति को Open Prostitution भी कहा जाता है। ये वैश्याएं एक निश्चित स्थान पर रहकर आने वाले ग्राहकों को संतुष्ट करती हैं। सामान्यतः इन वैश्याओं के कुछ निश्चित क्षेत्र होते हैं। जिन्हें Red Light Areas कहा जाता है। ग्राहकों के चुनाव में इनकी कोई पसंद नहीं होती। वैश्याओं में इन्हें सबसे निम्न स्तर की वैश्याएं कहा जाता है।

कॉल गर्ल्स –

इस प्रकार की वैश्याओं के धन्धे का कोई निश्चित स्थान नहीं होता। बल्कि ये ग्राहकों द्वारा बुलाए गए स्थान पर पहुँच जाती हैं। इनके धंधे का संचालन टैक्सी ड्राइवर, रिक्शा चालक, होटल कर्मचारी, फल विक्रेता एव दलाल आदि के माध्यमों से होता है। ये दलाल इन वैश्याओं को मिलने वाले धन में से कुछ हिस्सा लेते हैं। इन वैश्याओं की स्पष्ट रूप से पहचान कर पाना बहुत मुश्किल है।

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होटलों की वैश्याएं –

होटलों की वैश्याएं भी कॉल गर्ल्स की ही श्रेणी में आती हैं। बस इतना फर्क है जहाँ एक ओर कॉल गर्ल्स ग्राहकों के द्वारा बताए गए स्थान पर जाती हैं। वहीं होटल की वैश्याएं किसी निश्चित होटल आदि से संबंधित होती हैं। ये यहाँ आने वाले ग्राहकों को ही अपना ग्राहक बनाती हैं। बहुत से अमीर लोग जो महंगे-महंगे होटलों में जाते हैं वे इसी प्रकार की वैश्याओं का उपभोग करते हैं। वर्तमान समय में बहुत से लक्जरी होटल्स में यह धन्धा खूब फल फूल रहा है।

गुप्त वैश्याएं –

ये वैश्याएं सामान्यतः कार्यालयों व औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्य करती हैं। इस प्रकार की वैश्याओं में कॉलेज से ही दूषित विचारों वाली लड़कियां व आकर्षक जीवन व्यतीत करने वाली गृहणी महिलाएं होती हैं। इन वैश्याओं की स्थिति होटल की वैश्याओं से ऊपर की होती है। क्योंकि ये कभी कभी ही किसी विशेष ग्राहक को संतुष्ट करती हैं।

रखैल वैश्याएं –

ये वैश्याएं बड़े बड़े नगरों में फ्लैट लेकर लक्जरी जीवन व्यतीत करती हैं। ये किसी एक व्यक्ति की पर्सनल वैश्या होती है। जो व्यक्ति इनका सारा खर्च उठाता है वह इनका एकमात्र ग्राहक होता है। इनका ग्राहक कोई अधिकारी, व्यापारी, स्मगलर या अपराधी श्रेणी का होती है। जब तक उक्त व्यक्ति इनका संपूर्ण खर्चा उठाता है। ये उसकी रखैल के रूप में कार्य करती हैं।

वैश्यावृत्ति के कारण –

  • सामाजिक व सांस्कृतिक कारण
  • असुखी वैवाहिक जीवन
  • पारिवारिक विघटन
  • सामाजिक कुरीतियां
  • बचपन में दोषपूर्ण संगति
  • अस्वस्थ मनोरंजन
  • धार्मिक शोषण
  • अति निर्धनता
  • नौकरी की दशाएं
  • विलासी जीवन का मोह
  • जैविकीय व मनोवैज्ञानिक कारण
  • अपराधी गिरोहों का षड्यंत्र

सामाजिक व सांस्कृतिक कारण –

बहुत से सर्वेक्षणों के द्वारा यह स्पष्ट हुआ है कि साधारणतः वैश्यावृत्ति अपनाने वाली महिलाएं सामाजिक व सांस्कृतिक दशाओं का ही अधिक शिकार होती हैं।

असुखी वैवाहिक जीवन –

यह आज कल की आम समस्या हो गई है। जब कोई नव विवाहिता ससुराल में पति व ससुराल के अन्य सदस्यों द्वारा बार-बार अपमानित की जाती है। मार-पीटकर उसे घर से निकाल दिया जाता है। ऐसी स्थिति में बहुत सी निराश्रित स्त्रियां वैश्यावृत्ति को अपना लेती हैं। कुछ सालों पहले किए गए एक सर्वेक्षण में पता चला कि करीब 30 प्रतिशत महिलाएं असुखी वैवाहिक जीवन के बाद वैश्यावृत्ति अपना लेती हैं। वहीं एक दूसरे सर्वेक्षण से सामने आया कि वैश्यावृत्ति में लगी महिलाओं में 84 प्रतिशत महिलाएं कभी विवाहिता थीं। जिन्होंने प्रताड़ना व पति द्वारा त्यागे जाने के बाद यह रास्ता चुना।

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पारिवारिक विघटन –

जब किसी परिवार में पिता द्वारा शराब व जुएं में सारी धन संपदा लुटा दी जाती है। बात-बात पर माँ को पीटा जाता है। घर चलाने के लिए आपराधिक कार्य किये जाते हैं। ऐसी घर की लड़कियां इन सबसे ऊब कर वैश्यावृत्ति का मार्ग चुन लेती हैं। व्यभिचारी व अनैतिक चरित्र वाले माता पिता भी बच्चों को चारित्रिक पतन की ओर ले जाते हैं।

सामाजिक कुरीतियां –

कम आयु की लड़की का कुलीन अधेड़ से विवाह कर देना। विधवा को दूसरा विवाह न करने देना। साथ ही विधवा को सामाजिकता के नाम पर तरह तरह से प्रताड़ित करना। पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों को बात बात पर अपमानित करना। दहेज के नाम पर विवाहिता को प्रताड़ित करना। इन सब से व्यथित होकर बहुत सी स्त्रियां वैश्यावृत्ति जैसे कुकृत्य की ओर बहक जाती हैं।

बचपन में दोषपूर्ण संगति –

जो लोग बचपन से ही दोषपूर्ण संगति में पड़ जाते हैं, वे जल्द ही इस धंधे की ओर आकर्षित होते हैं। बुरी संगति में पड़ी लड़कियां बेहद कम आयु में ही यौन कार्यों में लिप्त हो जाती है। इसका परिणाम इन्हें वैश्यावृत्ति के धंधे तक ले जा सकता है।

अस्वस्थ मनोरंजन –

वर्तमान में बहुत से अश्लील, रोमांस पूर्ण, यौन आकर्षक, अपराध आदि से संबंधित सामग्री विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुँच रही है। ये आज कल के युवाओं के मन मस्तिष्क पर बेहद बुरा असर डाल रही है। यह दूषित सामग्री कामोत्तेजना को बढ़ाकर लड़कियों को पथभ्रष्ट कर देती है।

धार्मिक शोषण –

देवदासी की प्रथा भारत में सदियों पुरानी है। रामगढ़ गुहालेख भारत में मंदिर वैश्यावृत्ति का प्राचीनतम अभिलेखीय साक्ष्य है। दक्षिण भारत के बड़े-बड़े मंदिरों में युवा देवदासियों का पण्डों व पुजारियों द्वारा शोषण किये जान के बाद उन्हें वैश्यालय चलाने वाले दलालों को बेच दिया जाता था। धर्म के नाम पर पण्डों, पादरियों, मठाधीशों को ये युवतियां दान कर दी जाती थीं। इन्हें तन मन धन से सेवा कर ईश्वर प्राप्ति के मार्ग का सदैव से प्रचार किया जाता रहा है।

अति निर्धनता –

निर्धनता में भूख बर्दास्त कर पाना ही मुश्किल होता है। लेकिन जब एक युवती की माँ दवाई तक के लिए तरस रही ही। छोटे भाई बहन भूख से तड़प रहे हों। तो ऐसे में एक युवती के लिए अपना शरीर बेचना एक बाध्यकारी निर्णय बन जाता है। ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिलते हैं जिसमें अति निर्धनता के कारण स्त्री को ये पेशा अपनाना पड़ता है।

नौकरी की दशाएं –

वर्तमान समय में सरकारी या निजी किसी भी क्षेत्र में स्त्रियों का नैतिक जीवन पूर्णतः सुरक्षित नहीं। लुभावने पैकेज देने वाली कंपनियों में पहले तो सब आकर्षक लगता है। लेकिन जल्द ही स्त्रियों को इसकी काली सच्चाई पता चलती है। पहले ये बड़ी सैलरी देकर उनके सामाजिक स्तर को उठाते हैं। बाद में जब आपके खर्चे लाखों में पहुँच जाते हैं। तब ये आपको नौकरी में बने रहने के लिए आपका शोषण करते हैं। बहुत सी स्त्रियां इस प्रकार इनके इस कुचक्र का हिस्सा बन जाती हैं।

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विलासी जीवन का मोह –

बहुत सी स्त्रियां विलासी जीवन की चाह में अधिक से अधिक धन कमाने के लिए भी इस रास्ते को चुनती हैं।

जैविकीय व मनोवैज्ञानिक कारण –

कुछ स्त्रियां जैविकीय व मनोवैज्ञानिक दोषों के चलते भी वैश्यावृत्ति की ओर आक्रषित हो जाती हैं। असामान्य कामुकता के चलते स्त्री अपने पति से यौन सुख में संतुष्ट नहीं हो पाती। ऐसे में वह एक से अधिक पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाती है। यही वैश्यावृत्ति की पहली सीढ़ी साबित होती है।

अपराधी गिरोहों का षड्यंत्र –

यह वैश्यावृत्ति का आधुनिक आपराधिक रूप है। बड़े-बड़े शहरों में ऐसे कई गिरोह सक्रिय हैं। ये लोग विभिन्न स्थानों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर अन्य जगहों पर भगा ले जाते हैं। वहाँ ले जाकर ये इन लड़कियों को दलालों को बेच देते हैं। जो इनसे वैश्यावृत्ति का कार्य कराते हैं। ये लोग परिवार की असंतुष्ट स्त्रियों को भी टार्गेट करते हैं। ये लोग साधु, ज्योतिषी, फेरीवाले इत्यादि वेष में घूमते हैं। आज कल स्त्रियां ज्योतिषियों को अपने सभी दुख व घरेलू बातें बता देती हैं। बिना ये जाने कि उक्त व्यक्ति किस प्रवृत्ति का है।

वैश्यावृत्ति को नियंत्रित करने के प्रयत्न –

देश औऱ दुनिया में वैश्यावृत्ति को रोकने के तमाम प्रयास किये जा चुके हैं। ब्रिटिश भारत के दौरान इस ओर पहला कदम ‘बम्बई वैश्यावृत्ति निरोधक कानून 1923’ था। इसके बाद अन्य कई कानून पास किये गए। लेकिन आज तक कोई कानून वैश्यावृत्ति को पूर्णतः रोकने में सफल न हो सका। भारत के स्वतंत्र होने के बाद बहुत से राज्यों ने वैश्यावृत्ति के उन्मूलन के प्रयास किये। 1947 में ही ‘द् मद्रास देवदासी एक्ट’ पारित हुआ। इसके बाद अन्य कई राज्यों ने इससे संबंधित एक्ट पास किये। वैश्यावृत्ति में संलग्न महिलाओं को संरक्षण देने के प्रयास किये गए। वैश्यावृत्ति की समस्या को समझने के लिए 1954 ई. में केंद्र सरकार ने श्रीमती धनवंती रामाराव की अध्यक्षता में एक सलाहाकार समिति गठित की। वैश्यावृत्ति की समस्या का व्यापक अध्ययन करने के बाद समिति ने एक देशव्यापी कानून बनाने की सलाह दी। इसके बाद सरकार द्वारा ‘अनैतिक व्यापार निरोधक अधिनियम 1956’ लाया गया।

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