Love Marriage vs Arrange Marriage

Love Marriage vs Arranged Marriage
मेरे एक मित्र हैं उनके घर वालों ने उनकी Love Marriage नहीं कराई क्योंकि लड़की दूसरे धर्म की थी।

मेरे एक अन्य मित्र हैं उनके घर वालों ने उनकी Love Marriage नहीं होने दी जबकि लड़की तो अपने धर्म की थी पर जाति अलग थी।

एक मित्र की Love Marriage लड़की के घर वालो ने नहीं की, इस बार तो धर्म भी same था और जाति भी same थी। पर क्या है न कि वो लड़के की सरकारी नौकरी नहीं थी।

मेरे एक और मित्र हैं उनका तो हाल ही न पूछो। लड़की उन्ही के धर्म की, उन्ही की जाति की, और तो और उनकी तो सरकारी नौकरी भी थी। फिर भी घर वालों ने उनकी शादी नहीं होने दी। क्योंकि मामला आस पड़ोस का था, एक ही गली में रहते थे न।

अब फाइनल का सुनो इन साहब का तो सुन के मैं भी चक्कर मे पड़ गया कि अब ये कौनसा नया संकट पैदा हो गया। साहब और उनकी होने वाली (या यूँ कहो कि जो न हो सकीं) पत्नी। दोनों एक ही धर्म के, एक ही जाति के, सरकारी नौकरी भी, और तो और ये एक गली तो क्या एक शहर के भी नहीं। फिर पता नहीं माँ बाप ने कौनसी खुर्दबीन से ये देख लिया कि लड़का लड़की एक ही गोत्र के हैं।।।।

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निष्कर्ष :- घर वालों को जानबूझकर अपने बच्चों की जिंदगी नरक बनानी है। बच्चे मर जायें लेकिन साहब दुनिया, समाज, ढोंग, आडम्बर, झूठी शान में बाधा न आ जाये। भले में समाज में 2 कौड़ी की औकात न हो लेकिन ये अकल के अंधे पता नहीं किस दुनिया में जी रहे होते हैं।

Love Marriage के फायदे :-

  • दहेज से छुटकारा
  • पसंद का जीवनसाथी
  • पहले से उसके बारे में जानकारी होना
  • अच्छाइयों और बुराइयों के पता होना
  • अधिक विकल्प
  • जातिवाद जैसी बुराई से दूर

Arrange Marriage ke nuksan :-

  • दहेज
  • सीमित विकल्प
  • लड़की वालों पर आर्थिक रूप से शादी का बोझ डाल देना
  • लड़की के पिता पर भारी कर्जा
  • अजनबी से विवाह
  • घरेलू हिंसा
  • दहेज के लिए प्रताड़ना
  • सालों साल कोर्ट कचहरी का झमेला
  • दहेज के लिए हत्या

 

कुछ लोगों का मानना है कि Arrange Marriage अधिक सफल रहती हैं। ये विचारधारा कुछ दशकों पहले तक सही भी थी। परंतु यह भी एकतरफा मामला था। जिसमें स्त्रियों को पति के साथ सहानुभूति दिखा कर गुजारा करने को कहा जाता है। इसे अच्छे से समझने के लिए एक कहानी पढ़िए…..

Love Marriage vs Arrange Marriage :-

हम अक्सर आसमान के आजाद पक्षियों को देखते हैं। वो हमारी छत पे आ के बैठते हैं। लेकिन जैसे ही हम उनको छूने को जाते हैं तो वो उड़ जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ ‘पालतू’ पक्षियों को उनके मालिक जैसे चाहें रखें, उनको भगाएं, फिर भी उनके पास ही रहते हैं। दरअसल उन कैदी पक्षियों को आदत हो जाती है अपने मालिक को झेलने की। उन कैद के पक्षियों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होता। जो भी है इसी को झेलना है। यदि आप किसी के होने का दावा करते हैं तो महत्वपूर्ण है आजादी और अन्य विकल्पों का होना।

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ठीक यही सदियों से होता आया है अरेंज्ड मैरिज के साथ, जिसमें महिला की इच्छा के विरुद्ध उसके घर वाले उसका विवाह कर देते हैं। जैसे कि वो एक सामान हो, उसका अपने जीवन पर भी कोई अधिकार न हो। फिर कुछ दखियानूसी मानसिकता से पीड़ित लोग कहते हैं कि माँ-बाप ने जन्म दिया है तो उनका अधिकार है। लेकिन आज दुनिया बहुत आगे निकल चुकी है, यहाँ हर व्यक्ति को समानाधिकार प्रदान किये गए हैं। देश का हर नागरिक स्वयं से संबंधित फैसले लेने का अधिकारी है। वे दखियानूस लोग जो अपनी संतानों को अपना गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं, उनको सलाह है कि वे बच्चे ही पैदा न करें। क्योंकि बच्चों का अपना जीवन है, अपने अधिकार हैं, वे किसी के गुलाम नहीं।

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