गजनबी और गोरी

गजनबी और गोरी (Gaznabi aur Gori) –

गजनी के शासकों का प्रम : अलप्तगीन – पिराई – सुबुक्तगीन (यामिनी वंश की नींव) – इस्माइल – गजनबी

महमूद गजनबी को यमीन-उल-मिल्लाह (मुसलमानों का संरक्षण) की उपाधि बगदाद के खलीफा ‘अल कादिर बिल्लाह’ ने दी

तारीख-ए-यामिनी की रचना उत्बी ने की।

गजनी राज्य का संस्थापक – अलप्गनीन (सामानियों का एक तुर्क दास अधिकारी) था।

अलप्तगीन के गुलाम उत्तराधिकारी पिराई ने हिंदूशाही शासक जयपाल के पुत्र को हराया।

पिराई का उत्तराधिकारी सुबुक्तगीन हुआ। यह भी पिराई की तरह अलप्तगीन का गुलाम था। यह अलप्तगीन का दामाद भी था।

सुबुक्तगीन ने यामिनी वंश की नीव 977 ई. में रखी।

जयपाल के संघ ने दो बार गजनी पर आक्रमण किया परंतु हार के आये।

फिर सुबुक्तगीन ने जयपाल पर आक्रमण कर काबुल व जलालाबाद जीत लिए।

सुबुक्तगीन ने अपने छोटे पुत्र इस्माइल को उत्तराधिकारी चुना था जो अगला राजा बना।

तारीख ए सुबुक्तगीन की रचना किसने की – बैहाकी

सुबुक्गीन का बड़ा बेटा गजनबी(27) था इसने इस्माइल की हत्या कर गजनी की गद्दी हथिया ली।

गजनी के दरबारी कवि उत्बी ने इसके आक्रमण को जिहाद कहा।

गजनी के आक्रमण के कारण :- धन प्राप्ति, यश की कामना, भारत से हाथियों की प्राप्ति

‘वह बगदाद को भी वैसे ही निर्दयता पूर्वक लूटता जैसे सोमनाथ को, यदि वहाँ इतना धन’ – हैवेल

हेनरी इलियट के अनुसार गजनी ने 17 आक्रमण किये,

गजनी ने खैबर दर्रे से भारत में प्रवेश किया। इशे भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता था।

गजनबी वर्षा ऋतु की समाप्ति में गजनी से चलता था, शीत ऋतु में हमला, मार्च-अप्रैल में बापस

गजनबी का पहला आक्रमण 1001 में शाहीयों (चिनाव से हिंदुकुश) पर, जयपाल ने हारकर आत्महत्या कर ली।

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बाद में आनन्दपाल शासक बना, राजधानी नन्दन बनाई।

1004 में गजनबी ने मुल्तान (शिया करमाथीयों) पर आक्रमण।

गजनबी ने भारत में अपने विजित क्षेत्रों की व्यवस्था के लिए किसे नियुक्त किया – नौशाशाह (जयपाल का नाती)

1008-09 आनन्दपाल को छाछ के युद्ध में बैहन्द मैदान में हराया।

1014 में थानेश्वर के चक्रस्वामी मंदिर को लूटा

1015 में कश्मीर में लोहकोट (लोहारिन) दुर्ग जीतने का असफल प्रयास, गजनबी सेना की प्रथम पराजय (कारण खराब मौसम)

ये गजनबी की सेना की हार थी, गजनबी ने कश्मीर में कभी प्रवेश नहीं किया।

1018 में पहली बार गंगाघाटी में (3बार आक्रमण) – बरन(बुलंदशहर) – मथुरा – वृंदावन – कन्नौज

कन्नौज का प्रतिहार शासक राज्यपाल कन्नौज छोड़कर भाग गया।

महमूद गजनबी का सर्वाधिक फायदमेंद आक्रमण कन्नौज का था।

1019 में ग्वालियर के कालिंजर दुर्ग का घेरा डाला, शासक विद्याधर चंदेर को न हरा सका, संधि हुई।

विद्याधर ने गजनबी की प्रशंसा में गीत लिखा, गजनबी ने खुश होकर 15 किले दिये।

गजनबी ने पंजाब का सूबेदार किसे नियुक्त किया – आरियारुक

अलबरूनी : गजनबी का राजज्योतिषी

अलबरूनी मामुनी वंश के ख्वारिज्म शाह के राजनैतिक सलाहकार थे। अलबरूनी ने योगशास्त्र का अरबी में अनुवाद

इसने दक्षिण भारत के इतिहास के बारे में कुछ नहीं लिखा।

इस इतिहासकार ने अपनी पुस्तक में अरस्तू व प्लेटो का भी उल्लेख किया।

यह राजनीति स्थिति का नाममात्र का उल्लेख करता है।

अलबरूनी ने गजनबी की सेना में कन्नड़ सैनिकों का उल्लेख किया।

अलबरूनी हिंदुओं के कौनसे 2 प्रमुख त्यौहार बताता है – रामनवमी, शिवरात्री

शूदखोरी बर्जित, केवल शूद्रों की ही इसकी इजाजत। 2% ब्याज पर।

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सिद्धमात्रिका लिपि कहाँ लोकप्रिय थी – कश्मीर, कन्नौज, वाराणसी

भैक्षुकी – उडुनपुर की बौद्धों की लिपि

फराबी – दर्शनशास्त्र का विद्वान

फारसी का होमर किसे कहा जाता है – फिरदौसी

गजनबी के आदेश पर फिरदौसी ने 1000 छन्दों वाले शाहनामा की रचना की

गजनबी ने फिरदौसी को 6000 सोने के मिशकल देने का वादा किया, और दिये चाँदी के

फिरदौसी ने इन्हें लेने से मना किया और गजनी छोड़ दिया।

अंत में गजनबी ने क्षमा मांगी और 60 हजार सोने के मिशकल भिजवाईं

परंतु भेंट पहुँचने से पहले ही फिरदौसी का शव संस्कार के लिए निकल चुका था।

पुत्री ने ये भेंट लेने से इनकार कर दिया।

अपना रूप चित्रण बनवाने वाला पहला सुल्तान – महमूद गजनबी था।

गजनवी ने किस नदी पर बाढ़-ए-सुल्तान नाम से बांध बनाया – नवार नदी

अलबरूनी की किताब-उल-रेलहला (किताब-उल-हिन्द) का अंग्रेजी अनुवाद एडवर्ड सचाऊ ने, हिदी में रजनीकांत शर्मा ने

गजनबी के समय पहला वजीर – अब्बास फजल बिन अहमद

मुस्लिम शासकों में सर्वप्रथम गजनबी ने भारतीय ढंग के सिक्के तैयार किये।

गजनबी व उसके उत्तराधिकारी समूद ने अपनी पहुजातीय सेना में बड़ी संख्या में हिंदुओं की नियुक्ति की।

मुहम्मद गोरी –

तुर्कों के शंसबानी वंश का था।

क्रम  : अलाउद्दीन – गियासुद्दीन – शिहाबुद्दीन गोरी

मध्य-एशिया के गोर प्रदेश के लोग इस्लाम स्वीकारने से पहले महायान बौद्ध थे।

गोर के अलाउद्दीन ने गजनबी को छोड़कर गजनी वंश के सभी शासकों की कब्र खोदकर हड्डियां हवा में फैला दीं।

अलाउद्दीन (जहाँसोज) न गजनी को 7 दिन तक जलाया।

गियासुद्दीन गोर का शासक बना, इसका छोटा भाई ‘शिहाबुद्दीन गोरी’ गजनी का शासक बना।

गोरी ने अपने बड़े भाई के नाम के सिक्के ढलवाए, खुतबा पढ़वाया।

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1203 में गियासुद्दीन की मौत के बाद गोरी ने गोर को अपनी राजधानी बना लिया।

गोरी ने भारत पर आक्रमण गोमल दर्रे से किया।

मुल्तान (शिया करमाथी) – गुजरात (मूलराज/भीम2) – पंजाब (खुशरोशाह) – स्यालकोट – भटिण्डा (तबरहिंद किला) – तराइन

तराइन के पहले युद्ध का तात्कालिक कारण – गोरी द्वारा तबरहिंद के किले (भटिण्डा) को जीता जाना।

तराइन की पहली लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान के सेनापति गोविन्दराय (स्कंद) ने भाले से गोरी को घायल

पृथ्वीराज चौहान का अंत –

  • मिन्हाज – तुरंत हत्या कर दी गई
  • हसन निजामी – अधीनता स्वीकर कर अजमेर से शासन

गोविन्दराय – पृथ्वीराज का भाई था। दिल्ली का शासक गोविन्दराय का पुत्र बना।

गोविन्दराज – पृथ्वीराज का पुत्र था। अजमेर का शासक बना।

भारत में इक्ता (विलायत या खित्ता) व्यवस्था की शुरुवात गोरी (मुइज्जुद्दीन) ने की।

इक्ता अरबी भाषा का शब्द है, मिन्हाज ने अयालत शब्द।

पहली इक्ता 1192 में ऐबक को हांसी (कोहराम) की दी।

भारत में इक्ता का प्रारूप – खलीफा मुक्तादिर ने

इक्ता ए तमलीक – वंशीय इक्ता

फवाजिल – इक्ता से प्राप्त अतिरिक्त आय। जलालुद्दी ने अलाउद्दीन को फवाजिल भेजने से मुक्त कर दिया।

अक्ता प्राप्त सुल्तान की बेगमें तथा धार्मिक व्यक्ति – अक्ता धारकों की अंतिम श्रेणी में आते हैं।

बदायूं के मुक्ता ताजउद्दीन संजर कुतलुग ने मिनहाज को जीवनयापन हेतु अक्ता दी।

मो. तुगलक के समय से प्रत्येक इक्ता में 2 अधिकारी नियुक्त होते थे।

फिरोज ने इक्तादारी को वंशानुगत किया, हस्तांतरण की प्रथा कमजोर

गोरी के अमीर मुइज्जी (गुरीद) कहलाते थे।

गोरी के सिक्के देहलीवाल कहलाए।

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